पल में उतर गई रे भंग, ऐसा फटा भांग का गोला।
पीछे पीछे था भस्मासुर, आगे बगै रे अपना भोला।।
पल में उतर गई ............................।।
खुश होकर भस्मासुर को, वरदान दिया एक ऐसा।
मांग सका ना दूजा कोई, वर फिर उसके जैसा।।
पल में उतर गई ............................।।
सिर पर हाथ रखेगा जिसके, जल जाएगी काया।
वर को पाकर भस्मासुर ने, कर शिव की ओर बढ़ाया ।।
पल में उतर गई ................................।।
धरती अंबर एक कर दिया, इतना उसे भगाया।
आंख दिखाई भस्मासुर ने, जमकर शोर मचाया।।
पल में उतर .................................।।
नारी बनकर विष्णु जी ने, भस्मासुर बहकाया।
जलकर खुद ही राख हो गया, ऐसा उसे नचाया।।
पल में उतर गई ..............................।।
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