मन उसका दीवाना है ये,
मन उसका दीवाना है।
उसकी सेवा करता हूं मैं,
तू तो एक बहाना है ।।
मन उसका ......................................।।
पल में पैदा करता है वो, पल में पास बुलाता है।
माया से वो अपनी सारे, जग को रोज नचाता है।।
मन उसका ......................................।।
हंसता है तू,, रोता है तू, कुछ पाया कुछ खोया है।
आंख खुली है चमड़े की तू, जानबूझकर सोया है।।
मन उसका ......................................।।
गैर नहीं है कोई जग में, तू भी मेरा अपना है।
जान गया मैं सारी दुनिया, परमपिता का सपना है।।
मन उसका ......................................।।
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